Yogi kahaniyan | योगी बना महात्मा

 एक व्यक्ति के योगी बनने का सफर

इस कहानी में आपको एक व्यक्ति के योगी बनने का सफर के विषय में बताया जाएगा वह व्यक्ति किस प्रकार एक साधारण व्यक्ति सहयोगी बना उसने मानव समाज का कल्याण किया और अपना नाम इस धरती पर अमर करके चला गया तो चलिए फिर जानते हैं आखिर कौन है व्यक्ति और उसका क्या नाम है उसने कौन-कौन से ऐसे परमार्थ के काम किए जिनसे को जाना जाता है

Yogi kahaniyan
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कैसे एक व्यक्ति ने जोगी बनने की इच्छा करी और वह बना

से कहानी उस 12 साल के एक लड़के की है जो अपना संत बनने का सफर शुरू करता है उसका नाम सच्चितानंद होता है यह बच्चा कुछ अलग स्वभाव का था और इसका दर्द के कर्मकांड ओं में मन नहीं लगता था उसे हमेशा ईश्वर और उससे जुड़े कार्य कार्यों में मजा आता था और वह हमेशा उन्हें कार्यों में व्यस्त रहना चाहता था


1 दिन की बात है किस 12 साल के बच्चे ने थाना के मैं घर द्वार छोड़ दूंगा और ईश्वर की खोज में इधर-उधर भटकुंडा अतः उसने अपने माता-पिता से आज्ञा लेकर ऐसा कार्य और कदम उठाया वह हिमालय के जंगलों में तब करने के लिए चला गया और वह वहीं पर रहकर तब करता और ज्ञान प्राप्ति करने का प्रयास करता हूं उसने इस प्रकार कई साल बिता दिए लोगों के साथ उसका व्यवहार सदैव ऐसा ही बना रहा वह ज्ञान प्राप्त करने के लिए खंडू तपस्या करता रहता वह बस ईश्वर की एक झलक पाना चाहता था जिस कारण वह ईश्वर की आराधना में हमेशा विलीन रहता था

उसे तपस्या करते करते 20 साल से ज्यादा हो गया था एक दिन बरसात हो रही थी और बादल गरज रहे थे अचानक वह लड़का मुक्त मुक्त हो जाता है और उसके सामने एक प्रतिमा बन के आती है जोकि ईश्वर की प्रतिमा होती है अतः इस पर उसे विज्ञान देते हैं कि चारों तरफ शांति फैलाओ अतः वो उनके उपदेशों पर चलने का प्रयास करने लगता है और उनके उद्देश्यों में चलता है 


कैसे ज्ञान प्राप्त किया तथा तपस्या सफल हुए

किसानों की मेहनत और तपस्या के बाहर ईश्वर उसे दर्शन देते हैं और इस पर उसे अपनी इच्छा बताते हैं उसे एक कार्य सोचते हैं अतः उस कार्य को करने के लिए अपने स्थान को छोड़कर चला जाता है ईश्वर का कार्य लोगों के बीच जाकर शांति पहला ना एकता बनाना यही था अतः वह सब जगह इसी प्रकार की जागरूकता फैलाया करता था और भिक्षा मांग कर अपना पेट भरता था योगी बहुत ही भला मानुस था अतः दूसरों के प्रति हमेशा सदा अच्छा व्यवहार रखना पक्षपात ना करना जाति धर्म के आधार पर सभी को एक समान नजरों से देखना सभी के लिए उचित उपाय देना यही सब योगी ने 29 सालों की तपस्या में सीखा अतः यही सब को यान को वह दूसरे को देने के लिए हिमालय की वादियों से शहरों कामों गली कोचों में भटकने लगा इससे लोगों को जागरूक किया जा सके


कैसे बाग ज्ञान प्राप्त करके मानव कल्याण में लगा


योगी ने हिमालय की वादियों में 20 सालों तक ज्ञान प्राप्त किया और फिर उसने मानव समाज के कल्याण के लिए 72 बदर भटकने लगा तथा ईश्वर की संदेश को इधर उधर फैलाने लगाघर को अपना घर बना लिया था मानव समाज के कल्याण के लिए वह पूरा जीवन व्यतीत करने को तैयार था और वह इन्हीं कारणों से अपना जीवन व्यतीत कर रहा था

 वह केवल मानव समाज के कल्याण के सभी साथियों को करता बिना किसी धर्म जाति भेदभाव को ध्यान में रखकर ऐसा कोई कार्य नहीं करता इससे किसी भी व्यक्ति धर्म जाति को आहत हो हालांकि वह चारों तरफ केवल खुशियां चलाना जानता था और वह उसी कार्यों में व्यस्त रहता था

 

 कैसे उस व्यक्ति ने योगी का जीवन व्यतीत किया

 ईश्वर के उपदेशों को चारों तरफ फैलाने के लिए जो उसको कार्य सौंपा गया था ईश्वर द्वारा वह अपने कार्य को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करना था इसी कार्य को करते करते कई साल बीत गए और वह अपने कार्य में जुटा रहा उसने सारा जीवन मृत्यु तक एक योगी के रूप में बिताया और केवल वह केवल शांति फैलाता था जिससे लोगों के बीच लड़ाई झगड़ा ना हो और सभी लोग के मन में शांति बनी रहे

 उस समय लोग धर्म को लेकर बहुत ही उत्सुकता दिखाते थे उनकी नजर में उनका धर्म ही श्रेष्ठ था और वह अपने धर्म के अनुसार चलते थे परंतु यह योगी महानता और यह सभी धर्मों को एक नजर से देखता था और सभी धर्मों के लिए एक तरह का प्यार रखता था जय योगी केवल शांति और समृद्धि के गीत गाया करता था

 कैसे व मृत्यु को प्राप्त हुआ

 1 दिन की बात है कि जब योगी अपने समृद्धि और शांति प्रिय की तो वह गाते हुए एक गांव से गुजर रहा था तभी अचानक उसी योगी का पैर फिसल गया और सर पर मैं सब छोटा जाने की वजह से जोकि मृत्यु को प्राप्त होने लगा वहां पर उपस्थित लोगों ने उस योगी की काफी मदद करें परंतु काफी चोट लग जाने की वजह से उस योगी की जान नहीं बचा सके और वह मृत्यु शैया को प्राप्त हो गया

 जी आप योगी को जानना चाहते तो आपको हिमालय की पहाड़ियों में जाना होगा क्योंकि हिमालय के कुछ तौर पर एक गांव है गांव में इस योगी की आज भी एक कुत्तिया और उसके समाधि बनी हुई है यह एक सच्ची कहानी है जिसका प्रमाण हिमालय की घाटियों में आज भी मिलता है

 देश-विदेश से लोग इसकी एक झलक पाने के लिए हिमालय की पहाड़ियों पर चढ़ाई करते हैं और इसी योगी के मृत्यु वाले स्थान पर पहुंच कर अपने आप को सुख का अनुभव प्राप्त करवाते हैं

 शिक्षा

 हालांकि एक सत्य घटना पर प्रेरित कहानी है यह कहानी बहुत ही प्रचलित है और हिमालय की वादियों में आज भी आपको यह कहानी किसी ना किसी के मुंह से सुनने को मिल जाएगी बाबा सचिदा सच्चिदानंद बहुत है दयालु और कृपालु योगी थे जिन्होंने केवल और केवल लोगों की भलाई के विषय में ही काम किया यदि आज आप इनको देखना चाहते हैं तो हिमालय की पहाड़ियों में नेपाल में एक गांव है वहां पर इनकी छोटी सी एक कुटिया बनी हुई है और उनकी समाधि पर वही है तो आप वहां पर जाकर इस कहानी का पूर्ण अवलोकन कर सकते हैं यदि यह कहानी अच्छी लगी हो तो लेखक के लिए दो शब्द जरूर लिखें

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