12 Jyotirlinga :The Temple Of Shiva Shankar: १२ज्योतिर्लिन्गा : शिव शंकर जी के 12 मंदिर :
ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के अलग-अलग रूप के प्रभाव हैं जोकि विभिन्न राज्यों में ज्योतिमान तरीके प्रकाशित हैं यह भारत के अद्भुत और अभिनय अंगों में से एक हैं ज्योतिर्लिंग बहुत ही प्राचीन और रहस्य से भरे हुए हैं ज्योतिर्लिंग अगर इसका संधि विच्छेद किया जाए तो ज्योति का अर्थ होता है उजाला और लिंग का अर्थ है पौलुस
यह आध्यात्मिकता और सद्भावना से जुड़ा हुआ है जोकि मनुष्य के जीवन को सुखद बनाता है
यह मंदिर भगवान शिव अर्थात नाश करने वाला जटाधारी भोले शंकर और भी कई जैसे महाकाल भस्म करने वाला नामों से यह में जाने जाते हैं यह बहुत ही भोले हैं परंतु क्रोध आ जाने पर यह सब कुछ भस्म करने की भी शक्ति रखते हैं 12 ज्योतिर्लिंग इन्हीं के अंश है
कैसे बने ज्योतिर्लिंग मंदिर ?
ज्योतिर्लिंग मंदिर बनने की एक पौराणिक कथा है जोकि भगवान शिव की शिव पुराण में मिलती है इस पुस्तक में भगवान शिव के जीवन में घटित कई घटनाएं मिलती हैं उन्हीं में से यह एक है ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा
जब एक बार भगवान विष्णु और भगवान शिव के बीच में आपस में मतभेद हुआ की कौन सर्व शक्तिशाली है ऐसा माना जाता है कि मतभेद के दौरान भगवान शिव ने तुरंत ही एक विशाल प्रकाश स्तंभ का निर्माण किया और दोनों दिशाओं में प्रकाश के अंत को खोजने के लिए कहा तभी भगवान ब्रह्मा एक छोर की तरफ गए और दूसरी छोर की तरफ भगवान विष्णु गए भगवान ब्रह्मा ने अंत ना मिलने पर भी झूठ बोल दिया कि मुझे अंत मिल गया है और भगवान विष्णु ने तो हार ही मान ली अतः क्रोधित होकर भगवान शिव ने ब्रह्मा जी को श्राप दे दिया कि अब आपकी इस संसार में पूजा नहीं होगी भले ही आपने इस संसार को अपने हाथों से ही बनाया हो
ऐसा माना जाता है कि इन 12 जगहों पर जहां जहां पर 12 ज्योतिर्लिंग है यह प्रकाश के अंत को दर्शाता है अतः इसीलिए यह हिंदू धर्म में पूजनीय और सम्मानीय है |
यदि आप शांति और कुछ समय के लिए सुकून पाना चाहते हैं तो आप इन जगहों पर जरूर यात्रा करें क्योंकि इन जगहों पर जाने पर आपका आध्यात्मिक विचार अवश्य ही बदल जाएगा और आप अपने जीवन में कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित होंगे आप ज्योतिर्लिंग पर क्यों यात्रा करें ? आज मैं इसको विस्तार पूर्वक बताऊंगा इसके पढ़ने के पश्चात आप अपना विचार यात्रा पर कर सकते हैं या नहीं यह तो आप पर ही होगा
भारत में कुल 64 ज्योतिर्लिंग थे परंतु जिनमें से 12 अत्यधिक शुभ और पवित्र माने गए हैं अतः इसीलिए इन स्थानों को संयुक्त मिलाने पर इसका नाम 12 ज्योतिर्लिंग पड़ा इन सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में प्राथमिक स्थान की छवि लिंगम को दी गई है जोकि शुरुआत से अंतर को प्रदर्शित करता है और यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से सबसे ज्यादा पवित्र है और माना जाता है यही प्रकाश का मुख्य स्रोत है
अतः निम्नलिखित 12 ज्योतिर्लिंग कुछ इस प्रकार हैं
- 1-मल्लिका अर्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश
- 2 - सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात
- 3- महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश
- 4- ओमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश
- 5 - वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग झारखंड
- 6 - भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र
- 7 - रामेस्वरम ज्योतिर्लिंग तमिलनाडू
- 8 - नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात
- 9 - काशी विश्वनाथ वाराणसी
- 11 - केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड
- 12 - गणेश्वर ज्योतिर्लिंग औरंगाबाद
1-मल्लिका अर्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश
यह मंदिर आंध्र प्रदेश में स्थित है आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैला पर्वत पर है जोकि दक्षिण के कैलाश के रूप में जाना जाता है इस मंदिर के प्रमुख देवता भगवान मलिकार्जुन और जगदंबा देवी हैं यह एक विशाल मंदिर है जोकि शांति और सुख समृद्धि का प्रतीक है इस मंदिर के बनने के पीछे एक छोटी सी कथा है जो कि शिव पुराण में बहुत ही चर्चित है जब भगवान गणेश और कार्तिकेय का विवाह तय हुआ परंतु गणेश का विवाह पहले हो गया अतः इस बात से कार्तिकेय अपने माता पिता यानी शिव और पार्वती से नाराज होकर दूर क्रंच पर्वत पर गये अतः उसे अकेला देखकर शिव और पार्वती उसके पास आए और उन्होंने कार्तिकेय को समझाने का प्रयास किया परंतु कार्तिकेय समझने को तैयार ना था और फिर वह वहां से चला गया अपने पुत्र की परेशानी को देख भगवान शिव और पार्वती को बहुत ही ठेस पहुंची अतः उन्होंने 1 ज्योतिर्लिंग का निर्माण किया जो कि आगे चलकर मलिकार्जुन के नाम से जाना जाने लगा मल्लिका का अर्थ है
2 - सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात
यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के कठियावाड़ वार्ड जिले में तेरा पल के पास है यह एक प्रसिद्ध मंदिर है जो कि विश्व विख्यात है जिस प्रकार हर 1 ज्योतिर्लिंग के पीछे एक प्राचीन घटना जुड़ी हुई है उसी प्रकार सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से भी एक पौराणिक या प्राचीन घटना जुड़ी हुई है चंद्रमा का विवाह दक्ष प्रजापति के 27 में पुत्री से हुआ वह जिनमें से रोहिणी को सबसे ज्यादा प्यार करता था दूसरी पत्नी के अपने प्रति लापरवाही को देखकर उसने चंद्रमा को श्राप दे दिया की वह अपनी चमक खो देगा अतः चंद्रमा रोहिणी के साथ आया और उसने स्पार्क्स लिंगम की पूजा की और भगवान शिव का आशीर्वाद लिया उसी वक्त आशीर्वाद लेने के पश्चात चंद्रमा की रोशनी वापस आ गई अनुरोध करने पर भगवान शिव ने सोमचंद्र नामक नाम धारण किया वहां अनंत काल तक वह उपस्थित रहे इस कारण सोमनाथ मंदिर नाम प्रसिद्ध हुआ इसी को सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है
3- महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश
यह मध्य प्रदेश का बहुत ही प्राचीन तीर्थ स्थल है जो कि माना जाता है कि यह लोगों को मोक्ष देता है यह एक मोक्ष स्थल स्थल है इसलिए इससे मुक्ति स्थल भी कहा जाता है महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में घने महाकाल वन में शिप्रा नदी के तट पर उपस्थित है इस ज्योतिर्लिंग बनने के पीछे एक प्राचीन घटना है वह घटना इस प्रकार है कि एक 5 वर्षीय बालक था उसका नाम श्रीकर जो भगवान शिव के प्रति भक्ति में लीन रहा करता था वह अपनी भक्ति में इतना लीन था की एक दिन श्रीकर ने पत्थर की आराधना करना शुरू कर दिया उसे कई लोगों ने मनाने और समझाने की कोशिश की परंतु वह नहीं माना और अपनी भक्ति में ही लीन रहा | उस बालक श्रीकर की भक्ति देखकर भगवान शिव ने एक ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रवेश किया और वे हमेशा उसी में रह गए इस प्रकार उस जगह पर महाकालेश्वर मंदिर या महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का निर्माण हुआ यह हिंदुओं का बहुत ही पवित्र मंदिर है जिसे मोक्ष मंदिर भी कहा जाता है
4- ओमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश
ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश के नर्मदा नदी में शिवपुरी नामक द्वीप पर उपस्थित है एक प्रसिद्ध मंदिर है जिसको पर्यटक देश विदेश से घूमने आते हैं हर ज्योतिर्लिंग या मंदिर किसी ने किसी घटना पर आधारित है अतः इस ज्योतिर्लिंग के बनने की भी पीछे एक घटना है एक बार कई देवी-देवताओं और दानव में युद्ध शुरू हो गया अतः उस युद्ध में दानवों की जीत हुई और देवता है हार गए तभी भगवान शिव के पास सभी देवता देवी देवता गए और उनसे प्रार्थना की अत: भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना सुनने के पश्चात ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग में उतरे और दानवों को पराजित किया अतः इसी कारण ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग का निर्माण हुआ |
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5 - वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग झारखंड
वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग या मंदिर झारखंड के संताल परगना क्षेत्र में देवगढ़ में उपस्थित है यह अत्यधिक प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है वैद्यनाथ मंदिर को बैजनाथ मंदिर भी कहा जाता है इस ज्योतिर्लिंग बनने की एक प्राचीन घटना यह कहती है कि एक समय राजा रावण ने भगवान शिव का ध्यान करके उन्हें लंका आने को निमंत्रण किया जिससे रावण अमरता का वरदान मांग सकें अतः इस धूत नीति से भगवान शिव परिचित थे बहुत ही कोशिश करने के पश्चात भगवान शिव ने दर्शन ना दिया अतः राक्षस रावण ने कैलाश पर्वत उठा ले जाने पर उतारू हो गया तभी भगवान शिव क्रोधित होकर रावण के ऊपर बरसे और रावण को कुचल दिया परंतु रावण भी परम भक्त था रावण ने कहा मैं आपकी तपस्या करूंगा अवश्य परंतु मुझे 12 ज्योतिर्लिंग चाहिए अतः भगवान शिव ने दया दृष्टि से देखते हुए उसे 12 ज्योतिर्लिंग दे दिए हैं और वह जब वह उसे लेकर श्रीलंका जाने लगा तभी उसके शरीर के अंदर भगवान वरुण प्रवेश कर गए बता अब रावण व्याकुल होने लगा उसी समय भगवान विष्णु बालक के रूप में आए और उन्होंने लिंगम को जमीन पर रख दिया तभी रावण क्रोधित हुआ और तपस्या के रूप में उसने 9 सिर काट दिए अतः यह सद्भावना भगवान शिव को बहुत ही पसंद आई और भगवान शिव ने उसे पुनः आकर जीवित किया और एक व्यक्ति की तरह शरीर से सिर जोड़ दिया गया और ज्योतिर्लिंग को वेद के नाम वैद्यनाथ के नाम से जाना जाने लगा |
6 - भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र
भीमाशंकर मंदिर महाराष्ट्र के पुणे के सहयाद्री क्षेत्र के भीमा तट पर स्थित है जिस प्रकार 12 ज्योतिर्लिंग बनने की कहानी है ठीक उसी प्रकार भी इसकी पौराणिक कथा से एक संबंध है कुंभकरण के पुत्र भीम को जब ज्ञात हुआ कि वह भीम का पुत्र है तो उसने भगवान राम से बदला लेने के लिए ठान लिया और उन्होंने भगवान ब्रह्मा को तपस्या द्वारा खुश करने के लिए बाधित करना शुरू कर दिया जब भीम को यह शक्ति मिल गए तब उसने पूरी दुनिया में आतंक ढाना शुरू कर दिया जिससे सृष्टि इधर से उधर पलटने लगी भीम ने भगवान शिव के परम भक्त कामेस्वर को हराकर उसे कारागार में डाल दिया इस परिस्थिति को देखकर भगवान ब्रह्मा नाराज हो गए और उन्होंने भगवान शिव से पृथ्वी पर आने के लिए आग्रह किया और भगवान शिव ने पृथ्वी पर आने पर सभी राक्षसों को मार डाला अतः देवताओं की जीत हुई देवता इस प्रसन्नता के कारण भगवान शिव से पृथ्वी पर ही रुक जाने के लिए आग्रह करने लगे अतः भगवान शिव ने स्वयं को भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित किया कुछ महान विद्वानों का कहना है कि जब शिव और राक्षसों के बीच युद्ध हुआ तो शिव के एक बूंद पसीने से ही भीम नदी का निर्माण हुआ
7 - रामेस्वरम ज्योतिर्लिंग तमिलनाडू
यह ज्योतिर्लिंग भारत के दक्षिण के दक्षिण तमिलनाडु के सेतु तट से रामेश्वरम पर उपस्थित है यह मंदिर अक्सर चर्चा में बना रहता है और इस मंदिर का इतिहास बहुत ही पुराना है यह प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक तीर्थ स्थल है जहां श्रद्धालु अपनी श्रद्धा से आते हैं और कुछ समय तक रुकने के पश्चात चले जाते हैं इस जगह पर कई भव्य उत्सव होते हैं जो कि इस मंदिर की शोभा को और भी बढ़ा देते हैं इस मंदिर के बनने की पौराणिक कथा यह है कि जब भगवान श्री राम लंका से विजय करने के लिए जा रहे थे तभी इनको एक समुद्र तट पार करना था और उस समुद्र तट को देखकर भगवान श्री राम थोड़ी देर विश्राम करने के पश्चात पानी पीने लगे अतः समुद्र से एक आवाज है कि आप मेरा पानी कैसे पी सकते हो आपने मेरी पूजा नहीं की है अतः भगवान राम ने उसकी आवाज सुनी और उसी जगह पर एक शिवलिंग बनाकर पूजा शुरू की और प्रार्थना करने लगे कि वह रावण को हराने के लिए जा रहे हैं कृपया उन्हें मार्ग दिखाएं उनसे आशीर्वाद मिलने के पश्चात भगवान श्री राम लंका की ओर बढ़े परंतु उनका बनाया हुआ ज्योतिर्लिंग हमेशा के लिए अमर हो गया और उसी ज्योतिर्लिंग को आज रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग कहां जाता है
8 - नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात
नागेश्वर मंदिर को नागनाथ मंदिर भी कहते हैं जो गुजरात में सौराष्ट्र तट पर गोमती द्वारिका और बेड द्वारका द्वीप के बीच मार्ग पर उपस्थित है नागेश्वर ज्योतिर्लिंग जहर निवारण ज्योतिर्लिंग माना जाता है ऐसा माना जाता है कि यह ज्योतिर्लिंग जहर के प्रति सुरक्षा प्रदान करता है नागेश्वर ज्योतिर्लिंग बनने की यह घटना थी सुप्रिया नाम के एक शिशु को दानव दारूका ने पकड़ लिया और वह उसे अपने साथ ले गया और सुप्रिया को सभी कैदियों के साथ रखा सुप्रिया भगवान शिव की बहुत बड़ी भक्त थी अतः उसने सभी कैदियों से कहा कि डरने की कोई जरूरत नहीं है कोई तुम्हारा कुछ नहीं कर सकता है तुम्हें केवल ओम नमः शिवाय बोलना है इसी का जाप करना है जब सभी यह जाप करने लगे तो दारूका क्रोधित हो उठा और उसने सुप्रिया को मारने का हुक्म दे दिया जब सुप्रिया को मारने के लिए लोग दौड़े तभी अचानक शिव उपस्थित हुए और सभी लोगों का अंत कर दिया और इसी घटना को याद रखने के लिए नागेश्वर ज्योतिर्लिंग प्रारूप हुआ
9 - काशी विश्वनाथ वाराणसी
जैसा कि नाम से ही पता चलता है काशी यह वाराणसी में उत्तर प्रदेश राज्य मैं स्थित है यह बहुत पुराना मंदिर है क्यों क्योंकि काशी वाराणसी से जुड़ा हुआ है ऐसा माना जाता है कि यह देवताओं द्वारा स्थापित एकमात्र विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग है जहां मंदिर भगवान शिव के सबसे करीब मंदिरों में से एक है कहा गया कि यहां पर आज भी भगवान शिव निवास करते हैं और इसे मोक्ष का सर्वाधिक साधन बताया गया है इस मंदिर का निर्माण कई बार किया गया और कई बार मंदिर को तोड़ा भी गया है हालांकि आज भी या मंदिर अपने स्थाई रूप में है और काशी का सर्वाधिक लोकप्रिय मंदिर में से एक है जहां पर जितने भी श्रद्धालु आते हैं आत्मज्ञान लेकर ही जाते हैं और उनका जीवन सफल हो जाता है और वह मोक्ष की ओर अग्रसर हो जाते हैं वाराणसी बहुत ही पुरानी संस्कृति का गढ़ है जो कि मानव को हमेशा आनंद में करने के लिए तैयार रहती है
10 - त्रंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग नाशिक
त्रंबकेश्वर मंदिर गोदावरी नदी से ब्रह्मगिरि पर्वत के पास महाराज से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर उपस्थित है गोदावरी नदी को गौतमी गंगा के नाम से भी जाना जाता है यह दक्षिण भारत की सबसे पवित्र नदी में से एक हैं शिवपुराण की यह घटना है गोदावरी नदी का निर्माण गौतमी ऋषि और अन्य देवताओं के अनुरोध पर उपस्थित हुए गौतम ऋषि ने भगवान वरुण से एक वरदान मांगा कि उन्हें एक ऐसा गड्ढा दें जिससे भोजन की आपूर्ति हो सके और ऐसा ही हुआ परंतु देवताओं को ईर्ष्या होने लगी और उन्होंने एक गाय को भोजन समाप्त करने के लिए भेज दिया अतः गौतमी ऋषि को क्रोध आने पर उन्होंने गाय को मार डाला यह सब भगवान शिव को ज्ञात हुआ तब उन्होंने गोदावरी नदी का निर्माण किया और उसे निर्मल बनाया अतः शिव ने यहां स्वयं निवास किया यह सब प्रक्रिया से खुश होकर सभी देवताओं ने गान गाया और त्रंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का निर्माण किया |
11 - केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड
केदारनाथ मंदिर केदार नामक पर्वत पर समुद्र तल से 12000 फीट क्यों ऊंचाई पर हिमालय पर्वतमाला पर उपस्थित है यह एक ऐसा मंदिर है जो कि साल में सिर्फ 6 महीने खोला जाता है यह बहुत ही पवित्र मंदिर हैं इसीलिए श्रद्धालु यहां आने से पहले यमुनोत्री और गंगोत्री जाते हैं जिससे उसका कुछ पानी लाकर इस पर चढ़ाया जा सके पौराणिक कथा के अनुसार नर और नारायण की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इस ज्योतिर्लिंग का रूप धारण किया और यही निवास करने लगे यह एक पवित्र स्थल है और हर साल लाखों करोड़ों श्रद्धालु इसके दर्शन करने के लिए आते हैं जो इसे और भी आकर्षक बनाता है यह भगवान शिव का एक भव्य मंदिर है जिसे देखने से ही मन को शांति मिलने लगती है
12 - गणेश्वर ज्योतिर्लिंग औरंगाबाद
गणेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर औरंगाबाद के दौलताबाद से 20 किलोमीटर की दूरी पर वरुण नामक एक गांव में उपस्थित है गणेश्वर मंदिर के और भी कई नाम हैं जैसे कुसुमेस्वर, घुश्मेश्वर, घूमेस्वर, ग्रीस्नेस्वर आदि नामों से भी जाना जाता है महाराष्ट्र में औरंगाबाद के पास में भगवान शिव के और भी कई तीर्थ स्थल हैं जैसे अजंता एलोरा की गुफाओं में बने भगवान शिव के प्राचीन भव्य स्मारक कई प्रकार की प्राचीन वास्तु कलाएं जोकि औरंगाबाद और भी प्रसिद्ध कर रही हैं पौराणिक कथा के अनुसार सुधर्मा और सुदेहा दो दंपत्ति उसी जगह निवास किया करते थे उनके कोई भी संतान न थी वे बहुत ही परेशान रहा करते थे अतः सुदेहा ने अपनी छोटी बहन घुस्मा से विवाह सुधर्मा का करवा दिया और इन दोनों से एक संतान हुई अतः अब सुदेहा को इस बात से ईर्ष्या होने लगी अब घुस्मा को सभी प्रसन्नता की नजर से देखते हैं और सुदेहा को ईर्ष्या की नजर से अतः एक दिन सुदेहा ने घुस्मा के बेटे को उठाकर नदी में फेंक दिया जिससे घुस्मा को बहुत ही क्रोध आया और उसने कई लिंगो का निर्माण किया और उसकी पूजा करने लगी उसने भगवान शिव की भी आराधना की अतः भगवान शिव की घोर तपस्या करने के पश्चात भगवान शिव प्रसन्न हुए और उसे उसके बेटे को लौटा दिया घुस्मा के आग्रह करने पर भगवान शिव ने घुश्मेश्वर [ गणेश्वर ]का रूप धारण किया और वहीं पर निवास करने लगे अतः गणेश्वर ज्योतिर्लिंग का निर्माण हुआ
निष्कर्ष
12 ज्योतिर्लिंग भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है जहां पर सभी हिंदू श्रद्धालुओं को अपने जीवन काल में एक बार जरूर आना चाहिए यह वास्तु कला, शिल्प कला और विभिन्न अद्भुत कलाओं से स्थापित ज्योतिर्लिंग जो कि भारत के अलग-अलग कोनों में उपस्थित हैं भारत की हमेशा शान बढ़ाते रहेंगे अगर एक आप भारतीय हैं आप चाहे किसी भी धर्म के हो आपको इन जगह पर एक बार जरूर जाना चाहिए आपको आत्मज्ञान के लिए ऐसी जगहों पर जरूर यात्रा करें यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंग दुनिया भर में बहुत ही प्रसिद्ध हैं जो कि भारत की सांस्कृतिक छवि को बरकरार रखते हैं ऐसा माना जाता है की यह 12 ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के अंश हैं जिसमें भगवान शिव स्वयं निवास करते हैं और समय-समय पर अपने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद भी देते रहते हैं जिससे उन्हें मोक्ष, मन की शांति ,हमेशा आनंद पूर्ण रहना यह सभी क्रियाएं उनके जीवन में क्रियान्वित होती रहे 12 ज्योतिर्लिंग अद्भुत रहस्य से भी निपुण है यदि आप किसी ऐसे रहस्य के विषय में जानना चाहते हैं तो आप 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों की तरफ यात्रा जरूर करें क्योंकि हर बार आपको जाने पर कुछ नया अवश्य मिलेगा सभी श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार इन मंदिरों में अपना जीवन यापन करते हैं जो कि भारत की संस्कृति को और भी सुद्रण वह शुभ बनाता है












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