Khargosh aur kachhua ki kahani in hindi
प्रस्तावना -
इस कहानी में आप खरगोश और कछुए मैं हुई प्रतिस्पर्धा तथा उनके बीच हुआ संघर्ष इस कहानी को रचित किया गया है तथा या दिखाने का प्रयास किया गया है कि निरंतर वह लगातार प्रयास ही हमेशा सफल होता है इस कहानी में आप कछुआ और खरगोश में कौन श्रेष्ठ है यह एक दौड़ के द्वारा निर्धारित किया जाएगा हालांकि आप जानते हैं कि खरगोश की दौड़ बहुत तेज है परंतु यही तो आश्चर्यजनक घटना है जो कि आपको इस कहानी में जानने को मिलेगी
![]() |
| Khargosh aur kachhua ki kahani in hindi |
इस कहानी को आप यकीनन जानते होंगे यह बहुत चर्चित कहानियों में से एक है इस कहानी में आपको शिक्षा भी मिलेगी और घमंड ना करना और निरंतर प्रयास करते रहना भी सीखने को मिलेगा
खरगोश और कछुए के बीच में हुई बातचीत
या एक जंगल के बात है कि उस जंगल में भिन्न-भिन्न प्रकार के जीव जंतु रहा करते थे परंतु कछुआ और खरगोश दोनों ही आपस में किसी न किसी विवाद पर उलझा करते थे यही तीन उनका विवाद आपस में बढ़ता चला गया तथा खरगोश ने कछुए को एक प्रतिस्पर्धा करने के लिए उकसाया तथा उन दोनों के बीच उस प्रतिस्पर्धा से जो परिणाम निकलेगा उसी को साक्षी मानकर कौनसे श्रेष्ठ है या निर्धारित हो जाएगाकछुए ने खरगोश की बात मान ली और उन दोनों के बीच दौड़ की प्रतिस्पर्धा होगी ऐसा तय हो गया
खरगोश और कछुए की दौड़़
उन दोनों में यह निर्धारित किया गया के 1 पॉइंट निश्चित करना होगा और दूसरे पॉइंट तक जाने पर यह दौर खत्म हो जाएगी ऐसा दोनों के बीच निर्धारित हुआ दौड़ का समय निकट आया अतः खरगोश और कछुआ डॉल के लिए तैयार हुए और दौड़ना प्रारंभ कर दिया
जैसा कि आप जानते हैं कि कछुआ खरगोश से सीधी दौड़ में कभी नहीं जीत सकता है क्योंकि खरगोश बहुत तेज दौड़ता है कछुए के मुकाबले में खरगोश बहुत तेज दौड़ता है अतः खरगोश कछुए से तुरंत ही आगे हो गया और कुछ समय पश्चात खरगोश कछुए से बहुत दूर निकल गया खरगोश दौड़ते दौड़ते पीछे मुड़कर देखता है तो उसे कछुआ दूर-दूर तक कहीं नहीं दिख रहा होता है अतः वह दौड़ कर थक गया था तो वह पेड़ के नीचे आराम करने लगता है अचानक खरगोश की आंख लग जाती है और खरगोश उसी स्थान पर सो जाता है फिर धीरे-धीरे कछुआ दौड़ कर आ रहा होता है और वह खरगोश को सोता हुआ देखकर अपने आखिरी मंजिल पर पहुंचने के लिए दौड़ता रहता है वह खरगोश के बगल से निकल जाता है और मंजिल की ओर बढ़ता रहता है निरंतर वह दौड़ता ही रहता है भले ही वह धीरे-धीरे परंतु निरंतर तो होता ही रहता है
खरगोश और कछुए के बीच दौड़ का क्या परिणाम हुआ
इधर खरगोश की नींद खुलती है तो वह देखता है कि कछुआ अपने आखरी पॉइंट पर पहुंचने वाला है और वह इस दौड़ को जीत लेगा अतः खरगोश बहुत तेजी से दौड़ता है परंतु अब कछुआ केवल एक कदम ही दूर बचा है और कछुआ इस रेस को खत्म कर देता है तब तक खरगोश पहुंचता है कछुआ जीत चुका होता है परिणाम स्वरूप खरगोश इस दौड़ को हार जाता है क्योंकि वह बीच रास्ते में सो गया खरगोश और कछुए की दौड़ में कछुआ जीत के और खरगोश हार गया
शिक्षा
- खरगोश और कछुए के इस कहानी से विभिन्न प्रकार की शिक्षा मिलती है जिनको निम्नलिखित तरीके से आप समझ सकते हैं
- हमें अपने ऊपर घमंड नहीं करना चाहिए तथा दूसरे को कमजोर नहीं समझना चाहिए
- निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी है यदि आप निरंतर प्रयास करते हैं तो वहां पे यकीनन सफल होंगे वह चाहे जिंदगी के दौड़ क्यों ना हो
- जब कोई लक्ष्य सोचे या फिर पाने का प्रयास करें तो जब उस लक्ष्य पर पहुंच जाएं तभी रुके या जब मंजिल मिल जाए तभी रुके मंजिल तो कदम पर है आप उससे पहले ही आराम कर रहे हैं सो रहे हैं तो यह सब ठीक नहीं है जिस मंजिल को आप सोचें उस मंजिल पर पहुंचने के बाद ही आराम करें
- जीवन में प्रतिस्पर्धा हमेशा करते रहना जरूरी है इससे आपको अपनी कमजोरियों के विषय में पता चलेगा इसने आप सुधार सकते हैं
और पढे ...


0 comments