यह पृथ्वी के निर्माण की कहानी है
इस लेख में आपको एक ऐसी घटना के विषय में बताया जाएगा जिसे हम सभी लोगों को जानना बहुत ही जरूरी है क्योंकि हम अपनी अगर उत्पत्ति को नहीं जानेंगे तो अपने भविष्य को कभी नहीं सुधार सकते हैं इस कहानियां घटना में आपको पृथ्वी के विषय में कुछ ऐसे तथ्य मालूम चलेंगे जिन्हें सभी को पता होना बहुत जरूरी है तो चलिए फिर शुरू करते हैं
![]() |
| Prithvi ki kahaniyan |
पृथ्वी क्या है और इसका निर्माण कैसे होगा
यह प्रक्रिया लाखों-करोड़ों सालों पुरानी है और इस प्रक्रिया को होने में लाखों करोड़ों साल भी लगे हमारे ब्रह्मांड में सैकड़ों तारे हैं जिसे शोध भी एक तारा है एक समय जब सुर में भयंकर विस्फोट होता है तब उसके कुछ अंश अंतरिक्ष में इधर-उधर फैल जाते हैं जिस कारण कई छोटे-छोटे सूर्य एक बड़े सूर्य के गोलाकार चक्कर में चक्कर लगाने लगते हैं लाखों करोड़ों साल बीत आ गया और इस छोटे-छोटे सूर्य पर बड़े-बड़े उल्कापिंड पत्थर आंखें टकराकर इन छोटी-छोटी सूर्य के टुकड़ों को उठा के लिए और इन के ऊपर एक परत बना दे ऐसे कई ग्रहों का निर्माण हुआ जैसे पृथ्वी बृहस्पति शुक्र सनी शुक्र बुद्ध इसी प्रकार के सभी ग्रह सभी का निर्माण इसी प्रकार हुआ है
आज हम जिस पृथ्वी पर रहते हैं उस पृथ्वी का विनिर्माण इसी प्रकार हुआ है यदि पृथ्वी के गर्भ तक पहुंचने का यदि कोई साधन हो तो आप वहां पर निकला हुआ लावा बहता हुआ लावा पाएंगे जो कि हमारी पृथ्वी के केंद्र में उपस्थित है और वह हमारे पृथ्वी का मूल बिंदु है जो कि पृथ्वी को रहने योग्य बनाती ह लाखों सालों तक गिरान पड़े रहे लाखों-करोड़ों सालों तक दहकती रहे जगह जगह पर विस्फोट होते रहें फिर यह धरती धीरे-धीरे ठंडी हुई और रहने योग्य होने लगी
पृथ्वी पर जीवन कहां से आया
या तो एक बहुत ही विवादस्मक तथ्य है परंतु एक तथ्य कहता है कि अंतरिक्ष में किसी उल्का पिंड के द्वारा गिरने की वजह से पृथ्वी पर जीवन का निर्माण हुआ वैज्ञानिकों का कहना है की उस उल्कापिंड में कार्बन की मात्रा बहुत अधिक थे और जब वह पानी के संपर्क में आया तो वह जीवो को निर्माण करने की प्रक्रिया को शुरू कर सका पहले सेल बने सेल से फिर कोशिकाएं बनी कोशिकाएं से फिर अस्थि पंजर बना और फिर धीरे-धीरे मनुष्य का विकास होने लगा
क्या पृथ्वी के बाहर जीवन हो सकता है
यह सवाल तुम मुझे आपसे पूछना आपको क्या लगता है कि पृथ्वी के बाहर जीवन नहीं होगा जब पृथ्वी पर जीवन हो सकता तो पृथ्वी के बाहर जीवन क्यों नहीं हो सकता कि हम इस ब्रह्मांड में अकेले हैं ऐसा नहीं हो सकता उसको महान में अकेले नहीं है बल्कि पृथ्वी के बाहर भी जीवन है बस उसी मन को ढूंढा नहीं जा सका उनकी तो ब्रह्मांड कोई छोटी जगह नहीं है जिससे बड़ी आसानी से ढूंढा जा सके इसमें लाखों करोड़ों साल लग जाएंगे ऐसा कोई भी जरिया नहीं है जिससे हम ब्रह्मांड के लंबे सफर को खत्म कर सकें क्योंकि यह बहुत ही बड़ा है और अभी मानव जाति के पास ऐसे कोई संसाधन मौजूद नहीं है जिससे इसका सफल मुमकिन हो सके
खाना कि भविष्य में यदि कभी संभव हुआ तो लोग अंतरिक्ष की यात्रा करके उन ग्रहों तक भी पहुंच सकेंगे जहां पर और जीव दूसरे प्रकार के जीव या जिन्हें लोग परग्रही बोलते हैं उनसे मिल सकेंगे तो भविष्य का इंतजार करें
मानव जीवन के लिए पृथ्वी अपनी अनुकूल कैसे बनी
जैसा कि उपरोक्त पंक्तियों में बताया गया कि पत्नी को ठंडा होने में बहुत सालों का समय लगा अतः सर्च के विकसित होने के बाद तरह-तरह के जियो पृथ्वी पर विकसित होने लगे फिर लाखों-करोड़ों साल बाद पेड़ पर रहने यानी बंदरों का निर्माण हुआ और धीरे-धीरे बंदरों के अंदर समझदारी विकास आने लगी अतः उन्होंने लाखों सर करोड़ों साल संघर्ष करने के बाद मानव का शरीर प्राप्त कर लिया
जब पृथ्वी का वातावरण ठंडा हो गया तो इसमें जगह-जगह पर पौधे और बारिश होना शुरू हो गई बारिश की वजह से जगह-जगह पर हरियाली पेड़-पौधे जीव जंतु देखने को मिलने लगे पथरी जीव जंतु का घर बन गई वातावरण शांत हो गया
एक बड़ी वजह यह भी है पृथ्वी का कोड जिसमें देखता हुआ ज्वाला पथरी को चारों तरफ अपने ही दूरी पर घूमने पर मजबूर करता रहता है और सूरत से आने वाले रेडिएशन को भी दूर रखने के लिए बहुत मदद करता है पृथ्वी का वातावरण इस प्रकार का डिजाइन हो गया की सूत की हानिकारक पृथ्वी तक नहीं पहुंच पा रही थी
क्या मानव समाज पृथ्वी को नुकसान पहुंचा रहा है
अब 21वीं सदी है अब इस मानव ने अपना अधिकार स्थापत्य पूरी तरीके से पृथ्वी पर जमा लिया है और वह उसको दिन पर दिन नुकसान ही पहुंचाते जा रहा है वह केवल अपना लाभ देखने के लिए पृथ्वी के सभी संसाधनों को बारी बारी से उपयोग करके खत्म कर रहा है और वह इसका परिणाम नहीं जानता है वह केवल अपने लाभ के लिए सब को नुकसान पहुंचाने की बोर्ड में दौड़ रहा है
इसमें पृथ्वी के कई टुकड़े कर डाले हैं और उनको कुछ ना हम भी लेते हैं उन टुकड़ों पर अपना अपना अधिकार जमा कर बैठा है और अपने अपने टुकड़े को जितना हो सकता है उतना नुकसान पहुंचा रहा है
शिक्षा
यह एक प्रकार की पृथ्वी के निर्माण की कहानी है हालांकि यह संक्षिप्त वर्णन है इसके निर्माण में करोड़ों साल लगे हैं करोड़ों सदियां गुजर गई हैं यह माना जा सकता है कि मानव जाति इस धरती पर उपस्थित सभी जातियों से सर्वश्रेष्ठ है अतः यदि हमें श्रेष्ठा का स्थान मिला हुआ है तो हमें काम भी उसी प्रकार के करने चाहिए जिससे हमारी पत्नी को किसी प्रकार का नुकसान ना हो हमें हमारे परिवेश वातावरण पतली जीव जंतु जानवर सभी पर अधिकार है और अधिकार का में सही उपयोग भी करना है तो हमें अपनी पृथ्वी को आने नहीं पहुंचाना है यदि कहानी ने जानकारी हो तो लेखक के लिए दो शब्द जरूर लिखें
और पढे ...


0 comments