Hanuman Chalisa Lyrics In Hindi

  : हनुमान चालीसा लिरिक्स हिंदी भाषा में : Hanuman Chalisa Lyrics In Hindi :

हनुमान चालीसा यह एक ऐसी चालीसा है जिसे दुनिया का सभी व्यक्ति  जानता और  पहचानता है इस हनुमान चालीसा के अनेकों फायदे हैं हनुमान चालीसा में श्री हनुमान जी के  जीवन परिचय की कुछ झलक मिलती है 

भूत पिशाच निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे |

यह हकीकत है जब श्री  हनुमान जी का नाम लिया  जाता है तो कोई भी बुरी शक्ति उस मनुष्य को छू  नहीं  सकती है  यह माना जाता है की इन्होने अपना जीवन ब्रम्हचर्य में बिता दिया  हनुमान एक बहुत ही शक्तिशाली व्यक्ति हैं  |

वैसे तो हनुमान जी के कई वाक्ये हैं जो की रामायण काल में मिलते हैं आज मैं उन्हीं रामायण कालों में से किसी एक काल का वर्णन करूंगा जब हनुमान जी भगवान राम से मिले तो बस उन्हीं के होकर रह गए इन्होंने भगवान राम को और माता सीता को अपने दिल में छुपा कर रखा और समय आने पर सीना चीर कर दिखा दे भी दिया 
 हनुमान जी का दूसरा नाम राम भक्त है  असल में यह राम जी के बहुत बड़े भक्त हैं और उन्हें बहुत ही मानते थे
ऐसा माना जाता है दोस्तों की भगवान हनुमान आज भी जिंदा है क्योंकि किसी भी वेद पुराण में इनके मरने का जिक्र नहीं किया गया है अतः कई विद्वानों का कहना है की इन्हें कोई वरदान मिला था जिससे कि यह अमर रहे और आज भी हमारे बीच में हैं |

हनुमान चालीसा के लाभ

  • यदि आप भूत प्रेत पिशाच या ऐसी शक्ति जो शायद आपको परेशान करती हो और अचानक आपको डरा देती है तो आपको  हनुमान चालीसा को पढ़े |
  • मन की शांति के लिए हनुमान चालीसा को पढ़ें  यकीनन आपके मन को शांति मिलेगी जब आप हनुमान चालीसा पड़ेंगे तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आपको अच्छा महसूस होने लगेगा कि मेरे  आस पास ऐसी शक्ति है जो मेरी मदद कर रही है |
  • अच्छे कामों के उपलब्ध में यदि आप कोई अच्छा काम शुरू करने जा रहे हैं तो आप  हनुमान चालीसा को अवश्य पढ़ें जिससे आपका वह काम सुनिश्चित रूप से हो सके |
  • बेहतर जीवन बनाने के लिए यदि आपके जीवन में परेशानियां चल रही हैं तो आप इस हनुमान चालीसा को रोज पढ़ना शुरू कर दें अवश्य इन समस्याओं का समाधान होगा |

Hanuman Chalisa Lyrics In Hindi
Hanuman Chalisa Lyrics In Hindi


।। श्री हनुमान चालीसा दोहा ।। 
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मन मुकुर सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥ 
बुद्धिहीन तनु जानिकै सुमिरौं पवनकुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार॥ 
।। चौपाई ।। 
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
 राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥ 
महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
 कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥

 हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ 
शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥ 
विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥
 प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥

 सूक्ष्म रूप धरी सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ 
भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचन्द्र के काज सँवारे॥ 
लाय सँजीवनि लखन जियाए। श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥ 
रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

 सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ 
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ 
जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते। कबी कोबिद कहि सकैं कहाँ ते॥ 
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राजपद दीन्हा॥

 तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना॥
 जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
 प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥ 
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ 

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
 सब सुख लहै तुम्हारी शरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥ 
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनौं लोक हाँक ते काँपे॥ 
भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ 

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
 संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ 
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ 
और मनोरथ जो कोई लावै। सोहि अमित जीवन फल पावै॥

 चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥
 साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥ 
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन्ह जानकी माता॥ 
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ 
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ 

अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥ 
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥ 
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ 
जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ 

जो शत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥
 जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ 
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥
 शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥ 

विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ 
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥
 सूक्ष्म रूप धरी सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ 
भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचन्द्र के काज सँवारे॥

 लाय सँजीवनि लखन जियाए। श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥
 रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
 सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ 
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥

 जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते। कबी कोबिद कहि सकैं कहाँ ते॥ 
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राजपद दीन्हा॥
 तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ 
जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

 प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥ 
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
 राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
 सब सुख लहै तुम्हारी शरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥

 आपन तेज सम्हारो आपै। तीनौं लोक हाँक ते काँपे॥
 भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥
 नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
 संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ 
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सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ 
और मनोरथ जो कोई लावै। सोहि अमित जीवन फल पावै॥ 
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥
 साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥ 

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन्ह जानकी माता॥ 
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ 
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ 
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥ 

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥ 
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
 जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ 
जो शत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥ 
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ 
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥ ।।
   


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