{ 9 saal ke bacche ki satya kahani} 9 साल के बच्चे की सत्य घटना [हिंदी कहानीयां ]: Hindi Story :
यह कहानी एक बच्चे की है जिसकी उम्र लगभग 9 वर्ष होगी उसका नाम अभिषेक है वह सभी बच्चों की तरह एक नार्मल बच्चा है जिसने अभी तक दुनिया नहीं देखी है और दुनिया में क्या चल रहा है उसको जानकारी नहीं है किसी भी बच्चे को यह जानकारी नहीं होती है वह दुनिया में आने के बाद सब धीरे धीरे सीखता है यह जो घटना में आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहा हूं यह एक सत्य घटना है |
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| Hindi Kahaniyan { 9 saal ke bacche ki satya kahani} |
चलिए शुरू करते हैं अभिषेक एक प्यारा सा बच्चा है जिसके मन में कई विचार आते हैं उन विचारों में से एक विचार उसका जीवन के प्रति भी है कि वह आगे क्या बनना चाहता है और क्या करना चाहता है जिससे उसका जीवन सुखमय हो सके वह रोज सुबह उठता है और अपना बैग तैयार करके स्कूल की ओर जाता है स्कूल में पढ़ने में बहुत अच्छा है
हर दिन की तरह यह दिन भी उसका बहुत ही अच्छा था और रोज सुबह की तरह उठा और स्कूल जाने की ओर बढ़ा वह अपनी गली से स्कूल की ओर जा रहा था तभी अचानक उसके सामने एक पागल कुत्ता आता है और उसे पीछे से काट लेता है काटने के पश्चात वह स्कूल ना जाकर अपने घर आ जाता है और अपने मम्मी पापा को बताता है कि आज उसे एक कुत्ते ने काट लिया
यह गांव का एक प्यारा सा बच्चा है जो कि अपने गांव में बहुत ही लोकप्रिय है जब वह अपनी मम्मी पापा को बताता है तो उसके माता-पिता उसे डॉक्टर के पास ना ले जाकर एक पूजा पाठ करने वाले के पास जाते है झाड़-फूंक जैसी अंधविश्वासों की चीजों से उसके रेबीज के कीटाणु को काटने की कोशिश करते हैं हालांकि आप सभी जानते हैं कि यह संभव नहीं है कई जगह उसके झाड़-फूंक करवाई जाती है हां उसका जख्म तो भर जाता है परंतु उस कुत्ते के अंदर के कीटाणु जिसे रेबीज कहते हैं उस बच्चे के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं उनकी माता पिता के अज्ञानता के कारण उसे डॉक्टर के पास ना ले जाने से कुछ समय बाद उसकी तबीयत खराब होने लगती है जैसा कि आप सब जानते हैं आज 21वीं सदी में हमारे पास रेबीज का टीका उपलब्ध है गांव में रहने के बावजूद और अज्ञानता के कारण उस प्यारे से बच्चे को टीका नहीं लग पाता है उसकी हालत दयनीय होती जाती है उसे कई प्रकार के मानसिक अटैक पढ़ने लगते हैं 9 साल का बच्चा बहुत ही दर्द से गुजरने लगता है यही प्रक्रिया कुछ समय तक चलती रहती है और बच्चा मौत के मुंह में समा जाता है |
बच्चे की सोच-
अभिषेक नाम का बच्चा एक डॉक्टर बनना चाहता था उसने अपनी टीचर को कई बार बताया था की टीचर मैं बड़े होकर डॉक्टर बनना चाहता हूं परंतु आज उसकी अज्ञानता के कारण मौत हो गई कौन जिम्मेदार है इसका क्या वह बच्चा खुद जिम्मेदार है या उनके माता-पिता जिम्मेदार है हालांकि हमारे देश में बच्चों की मौतें होती हैं परंतु यह मौत अज्ञानता वर्ष हुई है यदि वह बच्चा आज जिंदा होता तो क्या वह डॉ ना वन चुका होता यह चलो मान लेते हैं नाभि बनता तो भविष्य में ऐसा काम जरूर कर रहा होता जिससे वह स्वयं और उसके परिवार वाले खुश रहते है
मैं एक लेखक आज सभी से पूछना चाहता हूं कि आखिर इस घटनाक्रम में किसकी गलती है और इसका सही उपचार क्या होना चाहिए आज भी हमारे देश में अज्ञानता वश लाखों-करोड़ों लोगों के मौतें हो रही हैं तो क्या कारण है जो यह मौतें हो रही हैं आपको नहीं लगता कि इस प्रकार की गांवों में या फिर अज्ञान लोगों में मुहिम चलानी चाहिए इससे ऐसी घटना दोबारा ना हो सके हालांकि हमारी सरकार ने ऐसी कई मुहिम चलाई हैं परंतु फिर भी यह संभव क्यों नहीं हो पा रहा है |
आज उस 9 साल के बच्चे की मौत हो गई है उसके माता-पिता पर क्या गुजरती होगी हालांकि कहीं हद तक उनके माता-पिता की भी गलती थी यदि सही वक्त पर उसे टीकाकरण कर दिया जाता तो शायद वह बच्चा आज बच जाता इस वाक्य से पता चलता है कि मनुष्य अज्ञानता बस क्या क्या कर सकता है आपको लगता होगा की ऐसे तो हमारी देशों में मौतें बहुत होती हैं एक मौत और हो गई तो क्या हो गया यह बोलने से पहले आप उस बच्चे की मां बाप के ऊपर थोड़ी सी नजर डालना या सोच कर देखना या उस जगह पर अपने आप को रख कर देखना आपको कैसा महसूस होगा जो उस समय आपको महसूस होगा वही सही उनके मां-बाप को महसूस होगा तो यह बोलना ठीक नहीं ह
निष्कर्ष - मैं लेखक सच में सच्ची घटना का क्या वर्णन करें मैंने इस सच्ची घटना को आपके सामने प्रस्तुत किया है मुझे लगता है कि आप मुझसे बेहतर ढंग से इसको समझ सकते हैं इस घटना को लेखक के द्वारा लिखा अंकित करना बहुत जरूरी था कहते हैं यदि आप अपनी गलतियों को किसी जगह पर लिख दे तो वह गलती दोबारा नहीं होती है अतः इस सच्ची घटना का उद्देश्य बस केवल इतना है कि आप इस घटना से कुछ सीख ले और अंधविश्वासों से दूर रहें मनुष्य की लापरवाही एक दिन मनुष्य का ही काल बनती है यदि ठीक समय पर उसके माता-पिता उसे टीकाकरण करा देते हैं तो आज वह 9 साल का बच्चा अभिषेक अपने गांव अपने मोहल्ले अपने माता-पिता के पास आज उपस्थित होता और शायद भविष्य में कुछ ऐसा काम करके दिखाता जिसको उसके माता-पिता उसके परिवार वाले और सारा देश उस पर नाज करता देखिए सभी बच्चे अलग होते हैं हां दुनिया में सैकड़ों बच्चे है मानता हूं मगर अच्छा काम , देश का नाम कुछ ही बच्चे रोशन कर पाते हैं और यह आप नहीं कह सकते हैं कि कौन सा बच्चा यह काम करेगा क्या एपीजे अब्दुल कलाम को पता था कि वह मिसाइल बनाएंगे हालांकि वह भी एक गरीब परिवार से थे तो इस दुनिया में कौन महत्वपूर्ण है इसका फैसला कोई दूसरा नहीं वह स्वयं करता है
मैं लेखक आपसे कुछ जरूरी सवाल पूछना चाहता हूं कि इस सत्य घटना में जिस भी व्यक्ति, वस्तु की गलती रही है कृपया अपने विचार आप नीचे लिख सकते हैं धन्यवाद |


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