Raja ki kahani | ऐक गरीब अपनी बुद्धि से बना राजा

 आज मैं आपको एक ऐसे राजा की कहानी बताऊंगा जोकि बहुत बहादुर है अपनी प्रजा की भलाई के लिए तत्पर तैयार है इसने कई जंगे लड़ी और कई रियासतों को अपने अंडर में लिया और अपना एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया कैसे यह राजा बना किन परिस्थितियों में इसमें इतना बड़ा और विशाल रहा साम्राज्य स्थापित किया इस कहानी में आपको इसी के विषय में विस्तार पूर्वक बताया जाएगा

Raja ki kahani
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राजा आशय का सेना में भर्ती होना


राजा आशा कोई पैदाइशी राजा नहीं है ना ही इसे जन्म से कोई राजपाट मिला यह एक आम आदमी है जो कि साधारण जीवन व्यतीत कर रहा है इस कहानी में इसके पूरे पूरे संघर्ष और किन परिस्थितियों से राजा बनता है जाना जाएगा


राजा आशय एक बहुत ही चालाक और होशियार और समझदार व्यक्ति है जो कि अपनी प्रगति के लिए किसी को भी हानि पहुंचा सकता है और अपनी ऊंचाई और अपनी उन्नति ही केवल चाहता है किसी को भी नुकसान पहुंचाने में पीछे नहीं हटता बस केवल उसकी उन्नति हो रही हो

1 दिन की बात है कि उस रियासत में एक राजा राज्य करते थे उस राजा का नाम पेरूमल था राजा पेरूमल ने राजा आशय को अपनी सेना में भर्ती होने के लिए कहा राजा आशा है इस मौका का फायदा उठाते हुए राजा पेरूमल की सेना में भर्ती हो गय


राजा आशा अपनी चाहने और समझदारी से राजा पेरूमल को अपने वश में करने लगा वह तंत्र विद्या जैसे कर्मकांड भी करता था उसकी कई प्रकार के लोग थे ऐसे हो जाते हैं बाबा थे जो यह सब काम किया करते थे जैसे लोगों को वश में करना उन लोगों के प्रॉब्लम को सॉल्व करना जो पहले से किसी प्रॉब्लम से ग्रसित हैं


राजा आशय का सेनापति चुना जाना


राजा आशा ने अपनी प्रचार और अपने साथी संघ को इतना मजबूत बना लिया था कि जब एक बार राजा पैरों मन में सेनापति की नियुक्ति के लिए सभी लोगों को नाम सुनिश्चित किया तो सबसे पहले राजा आशय का ही नाम आया और यह नाम सभी लोगों को बहुत ही पसंद था और इसी के अनुसार सभी लोगों ने राजा आशय को ही सेनापति चुन लिया अब राजा से एक उच्च पद पर है और बड़े बड़े फैसले स्वयं लेता है उसके हाथ में सकता है और वह किसी को भी इस पद पर रहते हुए नुकसान पहुंचा सकता है


अब राजा आशा आजा ना होते हुए भी एक राजा के जिंदगी जीने लगा और वह एयरप्लेन करने लगा कि वह सबसे उच्च पद पर यानी कि राजा की पदवी पर किस प्रकार बैठ सकता है जब यह सेनापति नियुक्त किया गया था उससे पहले से ही यह प्लानिंग कर रहा था कि सेनापति बनने के बाद सीधे राजा की पद को में लूंगा


इसने अंदर ही अंदर राजा के गुप्त चोरों को खोखला करना चालू कर दिया और राजा के सभी गुप्त जानकारियों को बाहर के गुप्त चोरों को देना चालू कर दिया जिससे राजा पर कई प्रकार के आक्रमण हुए जिससे राजा हसन ने नाकाम कर दिया इससे हुआ क्या राजा पेरूमल का विश्वास राजा आशा पर बनता चला गया


राजा आशय का राजा बनने का प्लान सफल हो गया


1 दिन की बात है कि राजा आशा राजा पेरूमल के कमरे में जाता है और एक शानदार हथियार से राजा पेरूमल की गर्दन काट देता है इससे पेरूमल के उसी जगह पर मृत्यु हो जाती है अब राजपाट खाली है राज के सिंहासन पर कौन बैठेगा अतः राजा आशय को कुछ महा मंत्रियों और सलाहकारों के द्वारा राजा नियुक्त किया जाता है


राजा आशा जो इतने समय से केवल और केवल इसी दिन की प्रतीक्षा कर रहा था कि क्या वह राजा बने और सत्ता उसके हाथ में आए आज वह दिन आ गया है राजा बनते हैं स्नेह व सभी नियम और कानून बदल डाले जो कि जनता की भलाई के लिए थे और इसने पूरी तरह से जनता पर जुल्म उठाना शुरू कर दिया 


वह जो चाहता वह करता वह अलग-अलग राज्यों को अपने राज्य में मिला था और अपनी क्षमता को बढ़ाता छोटे-छोटे राज्यों को को चलता हुआ वह आगे बढ़ने लगा राजा आशय के जुल्म और सितम उसे जनता इतनी परेशान हो गई थी कि जगह जगह पर विद्रोह शुरू होने लगे और राजा के खिलाफ नारेबाजी और मित्रों को होने लगे


राजा अपनी सत्ता में इतना मशगूल  हो गया कि वह अपनी परेशानी के सिवा किसी दूसरे की परेशानी को ना देखना चाहता है ना ही समझना चाहता है और और केवल वह केवल जनता को तकलीफ ही देता जा रहा था उसके नियम कानून किसी के भी लिए सही नहीं थे वह सभी लोगों के ऊपर बहुत ही टैक्स बढ़ाता जा रहा था


तरह से तानाशाह का जीवन व्यतीत करना पड़ रहा था वहां की जनता को क्योंकि राजा के पास सैनिक पहुंचते यूपी राजा के खिलाफ जाता राजा उसे फांसी पर चढ़ा देता था यह बहुत ही क्रूर और निर्दई शासक बना


राजा आशा को एक ऐसा ज्ञान मिला


1 दिन राजा आशा के दरबार में एक पुरोहित आता है जोकि राजा के उसके कर्मों और उसके सिद्धांतों को समझाता है लेकिन राजा यह सब चीजों पर विश्वास नहीं करता था अतः पुरोहित ने राजा को अपने राज्य में रुकने के लिए कहा राजा ने उसे अनुमति दे दे पुरोहित राजा के ही महल मे मेहमान की तरह समय बिताने लगा पुरोहित बहुत ही होशियार और चालाक व्यक्ति था


भक्ति भी तंत्र विद्या और काला जादू जैसी चीजों पर विश्वास करता और इनको किया करता था 1 दिन की बात है कि पुरोहित वश में करने वाली तंत्र विद्या को कर रहा था तभी राजा आशय वहां पर आ जाता है और पुरोहित से पूछता है आप यह क्या कर रहे हो तो पुरोहित उसे बताता है कि यहां वश में करने वाली तंत्र विद्या है जिससे किसी भी व्यक्ति को वस्तु को वश में किया जा सकता है 


राजा आशा को इन सब चीजों से पहले से ही विश्वास था और यह चीजों से उसको बहुत ही खुशी मिलती थी अतः पुरोहित और राजा में बहुत अच्छी दोस्ती हो गई और वह दोनों एक साथ रहने लगे ऐसे ही करते करते समय बिता पुरोहित राजा के साथ मिलकर कई राज्यों पर चढ़ाई करें और कई राज्यों को अपने में मिलाया अपना राज्य का विस्तार करने लगे


कैसे पुरोहित ने राजा आशय को उसके गद्दी से उतार कर खुद राजा बन बैठा


पुरोहित एक बहुत ही चालाक और होशियार व्यक्ति है वह भी राजा आशय के तरीके बुद्धि रखता है और वह भी राजा बनने की इच्छा रखता है क्योंकि इन दोनों की दोस्ती बहुत ही पुरानी हो चुकी है और बहुत साल बीत चुके हैं अतः इन्होंने कई राज्यों को अपने में मिलाया है जिस प्रकार राजा हसन ने राजा पेरूमल की गर्दन काटी थी ठीक उसी प्रकार पुरोहित ने भी राजा आशा की गर्दन काट दी 


यह पुरोहित ने बहुत ही चलाकर और युद्ध ने रणनीति के अनुसार किया ऐसे किसी के भी व्यक्ति को यह पता नहीं चल पाया कि आखिर राजा आशय की हत्या किसने की

अब राज पाठ और शाम राज फिर से अधूरा हो गया और उसे एक राजा और नए समझौते की जरूरत है जोकि राज्य को सुचारू रूप से चला सके फिर से गठन समिति का निर्माण हुआ और किस को राजा बनाएं इस पर प्रश्न उठना चालू हो गया


क्योंकि पुरोहित ने बहुत लोगों को अपने वश में और लालच से कर रखा था पता सभी लोगों ने उसी का नाम लिया इसी प्रकार पुरोहित को राजा बनने का अवसर मिला अब इस राज्य का लालन पालन एक ऐसे पुरोहित के हाथ में है जो कि काला जादू जैसे ताकतों पर भरोसा करता है और उसे स्वयं भी करता है अंधविश्वासी है अब वह राज पाठ चला रहा है इसके राज्य पाठ में इसने पुराने सभी कर जो की जनता को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे थे वह हटा दिए


और नए नए सेना मैं लोगों को भरना चालू कर दिया अपने राज्य का विस्तार चालू कर दिया इसी प्रकार समय बिता और इसने कई लड़ाइयां बड़े कई युद्ध लड़े और कई छोटे-बड़े राज्यों को अपने मिलाया 


राजा पुरोहित बहुत ही अय्याश और किस्म का आदमी था उसने कई शादियां करें और उनसे कई बच्चे हुए जोकि अगले पद के दावेदार बने इसी प्रकार समय पिता गया अब पुरोहित की संताने बड़ी हो चुकी हैं और राजा के पद के दावेदार के लिए वह भी भागीदार हो चुकी है परंतु पुरोहित अपना पद छोड़ना नहीं चाहता है और वह हमेशा राजा बना रहना चाहता है यह पुरोहित की संतानों को मंजूर नहीं है


पुरोहित का मारा जाना और पुरोहित के बेटे का राजा बनना


पुरोहित का बेटा का बेटा भी राजा बनने की इच्छा रखता है और वह भी राजा बनना चाहता है अतः जिस प्रकार पुरोहित ने राजा आशय की गर्दन काटी थी ठीक उसी प्रकार इसने अपने ही राज्य में अपने पिता पुरोहित की गर्दन को काट दिया और स्वयं राजा बेटा बन गया


सुशीला से लगातार चलता रहा एक के बाद एक लोगों का मरना हुआ और राजा का बना हुआ यह सिलसिला खत्म नहीं हुआ जब तक कि राजबाती शासन रहा तब तक यह सिलसिला चलता रहा


शिक्षा

  • कहानी समय यह शिक्षा मिलती है कि आप जिसके साथ जैसा व्यवहार करते हो लोग भी आपको वैसा ही व्यवहार बदले में देते हैं यदि आप किसी को मारने का प्लान करते हो तो यकीनन कोई ना कोई आप को भी मारने का प्लान कर रहा होगा
  • एक पुरानी कहावत है जैसी करनी वैसी भरनी तो यह कहावत इस जगह पर बिल्कुल सटीक और सही बैठ रही है आदमी के कर्म ही उसके आने वाले समय का निर्धारण करते हैं\
  • क्योंकि यह बहुत पुरानी कहानी है अतः सभी पुरानी कहानियां हमें कुछ ना कुछ सीख अवश्य देते हैं तो इससे हमें सीख लेनी चाहिए और जीवन में दोबारा ऐसी गलती ना हो इसके लिए तत्पर रहना चाहिए


इस  कहानी से आपको थोड़ी सी भी सीख मिली हो या जानने को मिला हो तो राइटर के लिए दो शब्द जरूर लिखें और यदि आप इन्हीं शब्दों में किसी ऐसे व्यक्ति की कहानी सुनना चाहते हैं तो आप नीचे कमेंट में लिख सकते हैं

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